हिंदी शायरी
वैसे तो मेरे लिखनेका सफर १३-१४ साल पहिले शुरू हुआ था | कुछ शायरी हिंदीमे करने की कोशिश की थी| उम्मीद है आप इसे पसंद करेंगे|
शशांक
वजह
उनके आनेसे हवांऐ जरा महकसी गयी
उनके गालोंपे मुस्कुराहट जरासी खिलसी गयी
उनके चेहरेपे हमारी निगाहे जरासी रुकसी गयी
उनकी निगाहे जरासी झुकसी गयी
दिलोदिलोंकी धडकनें जरासी मिलसी गयी
दुनियाकी हलचलें जरासी थमसीं गयी
उनके आने की वजह भी हमीं तो थे
उनके मुस्कुराने की वजह भी हमीं तो थे
दरख्वास्त
मैने कहा हवाओंसे इक पल तो रुक जा
उनके चेहेरेपें बिखरी जुल्फें जरा संवार तो लू
मैने कहा बारिशसे थोडी रुक जा जरा
उनके चेहरे पे ठहरी बूंदे पी तो लू
मैने कहा जिंदगीसे थम ले जरा
उनके साथ कुछ पल जी तो लू
तस्वीर
रातभर खाबोंका चलचित्र
चलतां ही रहा
आँख खुली तो पता चला
बीती यादोंका कारवा था
हम सोचते थे
हम उन्हें भुला पाये है
पर उनकी तस्वीर
अभीभी दिलमें बरकरार है
राझे दिल
मेरे दिल के दरवाजेपर
दी है किसीनें दस्तक
कैसे बयां करु दिल का हाल
छुपाउं मै कबतक
जुबांपें तो लगा दिये है मैने ताले
पर नजरें बचाए कहातक
दिल है के मानता ही नही
इष्क-ए-राझ छुपाना जानता ही नही
सुकून
यह बात सच है
आज आपका साथ नही
सुकून इस बातका है
कुछ कदम साथ तो चले
लम्हे
जिस तरह समुंदर की रेत
हाथोंसे फिसल जाती है
उसी तरह लम्हें
जिंदगी से फिसल जाते है
पीछे छोड जाते है
यादोंके पलछिन
जैसे गीली रेतपर
गुजरे हुऐ पैरों के निशान
अकेलापन
आजकल अंधेरोंसे उतना डर नही लगता
जितना दिनके उजालोंसे लगता है
अंधेरोंमे तनहाई साथ होती है
और भीडमे भी अपना एहसास दिलाती है
तनहाई
मै कहता कुछ और हूं
लोग सुनते कुछ और है
मै कुछ कहना चाहता हूं
लोग कुछ और ही सुनना चाहते है
मै सबके साथ रहना चाहता हूं
पर भीड मुझे तनहा छोडना चाहती है
बूंदे
सुबह तकियेमे थोडा गीलापन था
दिलको टटोलकर देखा
तो पता चला
वो खाबोंमे बहाए हुए आंसू थे
आज सुबह तकिया फिरसे गीला था
आखें तो रातभर सोयी कहा थी
न जाने खाब था या असलियत
सैलाब तो आंसुओंका उमड पडा था
टूटे दिल की कहानी
सोचा तो था करें बयां
टूटे दिल की कहानी
लेकिन दिल के साथ
अल्फाज ही बिखर गए
सोचा था सुनाएंगे उन्हें
अपने दिल की विरानी
पर उसी विरानीमें
अरमान दफन हो गऐ
हसरत थी कभी उन्हें
बाहोंमे भरनेकी
पता न चला कब वो
हाथोंसे फिसल गऐ
सोचते रह गऐ
करे तो क्या करे
रात दिन दिलके टुकडोंको
गिनतेही रह गऐ
उम्मीद
माना के उम्र की
चढती कमान है
पर दिल में उम्मीद
अब भी बरकरार है
माफी
वो रुठे है इस तरह
मनाए नही मानते
शक्ल ऐसी बना रखी है
की हमें जानकर भी
नही जानते
इतना गुरुर करना
तो हम भी आता है
पर क्या बताए हुजूर
इष्क का गम
जाते नही जाता है
चलो दिलसे समझौता
कर ही लेते है
गलती तो हमारी है नही
फिर भी माफी
हम ही मांग लेते है
बिजली
अंदाज शायीराना है
मिजाज कातीलाना है
बिजली तो गिरने वाली है
किस पर गिरेगी यही देखना है
हम पर गिरेगी
तो हंसकर झेलना है
शायद मिजाज बदल जाए
किस्मत को आजमाना है
तनहाई
मन में एक
तनहा सोच उभरती है,
मै ही तनहा क्यूं हूं?
पर सोचता हूं,
मै ही नही, सभी तनहा है,
बस हर एक शक्सकी
तनहाई तनहा है।
रेतसे लम्हे
क्यू उन लम्होंको याद करे
जो रेत की तरह
हाथोंसे फिसल गए थे
क्यूं उन लम्होंका जिक्र करे
चंद जो बचे हुऐ है
क्यूं न आज में जीले
लम्हा जो ठहरा हुआ है
Why dwell on those moments
Which have slipped through
Our hands like grains of sand
Why think about future moments
A few that remain anyway
Why not live the moment
Which is now
तकदीर
ऐ हुस्नवाले, आपकी तस्वीर
हमारे दिलमें है।
इक्कीस गुलाबोंकी सलामी
आपके नसीब में है ।
अब देखना यह है,
गुलाबोंकी पगदंड,
या काटोंकी शेज,
क्या हमारे तकदीरमें है।
मौसम
मोसम है आशिकाना
दिल भी है शायराना
थक गयी है आंखे
आ भी जाओ जाने जाना
नजारा
बहुत खूबसूरत नजारा है
महकी हुई है हवाए
पर देख नही पा रहे है हम
उनके चेहरे ये जो
हटती नही है निगाहे
लिफाफा दिलका
मै तो लिफाफे में बंद
चिठ्ठी भी पढ लूं
पर पता नही
उसके दिल में क्या चल रहा है
खामोशी
हद तो तब हो गयी
जब मेरी खामोशीने
मुझपर इल्जाम लगाया
मै उसे परेशान कर रहा हूं
आजकल खुदसे बहुत ज्यादा
बाते करने लगा हूं



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वाह!
By : Mrunal