मुस्कुराहाट


मुस्कुराहाट

शशांक पुरंदरे

उनके आनेसे हवांऐ
जरा महकसी गयी

उनके गालोंपे मुस्कुराहट
जरा खिलसी गयी

उनके चेहरेपे हमारी निगाहे
जरा रुकसी गयी

उनकी निगाहे
जरा झुकसी गयी

दिलोदिलोंकी धडकनें
जरा मिलसी गयी

दुनियाकी हलचलें
जरा थमसीं गयी

उनके आने की
वजह भी हमीं तो थे

उनके मुस्कुराने की
वजह भी हमीं तो थे

Comments

मस्त 👌

By : शीतल खिरे
21/04/2025 07 : 54 : 21 AM

Wah

By : Shirish
21/04/2025 07 : 55 : 02 AM

👌👌👌

By : Mrunal
21/04/2025 09 : 04 : 53 AM

वाह जनाब! बहूत खूब!

By : Sandeep V Nachane
21/04/2025 11 : 18 : 30 AM

कवितेबरोबर मोहिनीचे स्मित हास्य पण छान ❤️

By : M chitre
22/04/2025 08 : 59 : 29 AM

बहोत खूब

By : Hemangi Pradeep Kulkarni
22/04/2025 10 : 29 : 46 PM

कविता के साथवाली तस्वीर ने इस सुंदर कविता को चार चाँद लगा दिये!

By : Sheela Bahadkar
04/05/2025 12 : 46 : 49 PM

सुहास्य तुझे मनासि मोही (नी!) जशी न मोही सुरासुरांही!!

By : Bhalchandra Shrikhande
14/05/2025 09 : 38 : 38 AM
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