मुस्कुराहाट
मुस्कुराहाट
शशांक पुरंदरे
उनके आनेसे हवांऐ
जरा महकसी गयी
उनके गालोंपे मुस्कुराहट
जरा खिलसी गयी
उनके चेहरेपे हमारी निगाहे
जरा रुकसी गयी
उनकी निगाहे
जरा झुकसी गयी
दिलोदिलोंकी धडकनें
जरा मिलसी गयी
दुनियाकी हलचलें
जरा थमसीं गयी
उनके आने की
वजह भी हमीं तो थे
उनके मुस्कुराने की
वजह भी हमीं तो थे



Comments
मस्त 👌
By : शीतल खिरे
Wah
By : Shirish
👌👌👌
By : Mrunal
वाह जनाब! बहूत खूब!
By : Sandeep V Nachane
कवितेबरोबर मोहिनीचे स्मित हास्य पण छान ❤️
By : M chitre
बहोत खूब
By : Hemangi Pradeep Kulkarni
कविता के साथवाली तस्वीर ने इस सुंदर कविता को चार चाँद लगा दिये!
By : Sheela Bahadkar
सुहास्य तुझे मनासि मोही (नी!) जशी न मोही सुरासुरांही!!
By : Bhalchandra Shrikhande